श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  2.6.122 
তুমি সে প্রহ্লাদ-লাগি’ কৈলে অবতার
হিরণ্য বধিযা’নরসিṁহ’-নাম যার
तुमि से प्रह्लाद-लागि’ कैले अवतार
हिरण्य वधिया’नरसिꣳह’-नाम यार
 
 
अनुवाद
नृसिंहदेव के रूप में आपने प्रह्लाद का उद्धार करने और हिरण्यकशिपु का वध करने के लिए अवतार लिया।
 
You incarnated as Narasimhadev to rescue Prahlada and kill Hiranyakashipu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)