श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  2.6.121 
তুমি রক্ষ-কুল-হন্তা জানকী-জীবন
তুমি গুহ-বর-দাতা, অহল্যা-মোচন
तुमि रक्ष-कुल-हन्ता जानकी-जीवन
तुमि गुह-वर-दाता, अहल्या-मोचन
 
 
अनुवाद
आप आसुरी वंशों के संहारक हैं। आप सीता के प्राण हैं, गुह को वर देने वाले हैं और अहिल्या का उद्धार करने वाले हैं।
 
You are the destroyer of demonic clans. You are the life of Sita, the boon-giver of Guha, and the savior of Ahalya.
तात्पर्य
रक्ष-कुल-हन्ता पद का अर्थ इस प्रकार है: रामावतार में भगवान गौरसुन्दर ने रावण के नेतृत्व में राक्षस वंश को मारने का लीला प्रदर्शन किया। गुहा-वर-दातृ पद यह दर्शाता है कि उन्होंने गुहक को वरदान दिया था, जो चाण्डालों के परिवार में जन्म लिया था। अहल्या-मोचन पद यह दर्शाता है कि उन्होंने अहल्या को मुक्त किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)