ततः चावीरभूत साक्षात्
श्री रामा भगवत्-परा
रंजयंती दिशः कान्त्या
विद्युत सौदामनी यथा
“फिर भाग्य की देवी, रामा प्रकट हुईं, जो सर्वोच्च भगवान भगवान द्वारा आनंद के लिए बिल्कुल समर्पित हैं। वह बिजली की तरह प्रकट हुईं, संगमरमर के पहाड़ को रोशन करने वाली बिजली को पार करते हुए।”
