श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  2.6.115 
জয জয ভকত-বচন-সত্যকারী
জয জয মহাপ্রভু মহা-অবতারী
जय जय भकत-वचन-सत्यकारी
जय जय महाप्रभु महा-अवतारी
 
 
अनुवाद
उन प्रभु की जय हो जो अपने भक्तों के वचनों को साकार करते हैं! सभी अवतारों के परम स्रोत, महाप्रभु की जय हो!
 
Glory to the Lord who fulfills the promises of His devotees! Glory to Mahaprabhu, the ultimate source of all incarnations!
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)