श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  2.6.113 
এই শ্লোক পডি’ আগে নমস্কার করি’
শেষে স্তুতি করে নানা-শাস্ত্র-অনুসারি’
एइ श्लोक पडि’ आगे नमस्कार करि’
शेषे स्तुति करे नाना-शास्त्र-अनुसारि’
 
 
अनुवाद
सर्वप्रथम उन्होंने इस श्लोक का पाठ करके प्रणाम किया, तत्पश्चात् उन्होंने विभिन्न शास्त्रों के अनुसार प्रार्थनाएँ कीं।
 
First of all he recited this verse and paid obeisance, after that he offered prayers according to various scriptures.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)