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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन
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श्लोक 109
श्लोक
2.6.109
পঞ্চ-শিখা জ্বালি’ পুনঃ করেন বন্দনা
শেষে ’জয-জয’-ধ্বনি করযে ঘোষণা
पञ्च-शिखा ज्वालि’ पुनः करेन वन्दना
शेषे ’जय-जय’-ध्वनि करये घोषणा
अनुवाद
उन्होंने पाँच घी की बत्तियों वाला दीपक जलाया और पुनः प्रार्थना की। अंत में उन्होंने ऊँची आवाज़ में कहा, "जय! जय!"
He lit a lamp with five ghee wicks and prayed again. Finally, he shouted loudly, "Jai! Jai!"
तात्पर्य
पाँच-शिखा पद पाँच घृत बाती वाले दीपक को इंगित करता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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