श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  2.6.108 
গন্ধ, পুষ্প, ধূপ, দীপ, পঞ্চ উপচারে
পূজা করে প্রেম-জলে বহে অশ্রু-ধারে
गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, पञ्च उपचारे
पूजा करे प्रेम-जले वहे अश्रु-धारे
 
 
अनुवाद
उन्होंने चंदन, पुष्प, धूप और घी जैसी पाँच सामग्रियों से भगवान की पूजा की। भगवान की पूजा करते हुए उनकी आँखों से प्रेम के आँसू बहने लगे।
 
He worshipped the Lord with five ingredients: sandalwood paste, flowers, incense, and ghee. Tears of love flowed from his eyes as he worshipped the Lord.
तात्पर्य
पूजा की पाँच सामग्री हैं- चन्दन, फूल, धूप, घी और नैवेद्य। (देखें हरि-भक्ति-विलास ११.४८)
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)