श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  2.6.107 
চন্দনে ডুবাই’ দিব্য তুলসী-মঞ্জরী
অর্ঘ্যের সহিত দিলা চরণ-উপরি
चन्दने डुबाइ’ दिव्य तुलसी-मञ्जरी
अर्घ्येर सहित दिला चरण-उपरि
 
 
अनुवाद
उन्होंने तुलसीदल को चंदन में डुबोया और अर्घ्य की सामग्री सहित भगवान के चरणकमलों पर रख दिया।
 
He dipped the basil leaves in sandalwood paste and placed them at the Lord's feet along with the offering materials.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)