श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  2.6.106 
প্রথমে চরণ ধুই’ সুবাসিত জলে
শেষে গন্ধে পরিপূর্ণ পাদ-পদ্মে ঢালে
प्रथमे चरण धुइ’ सुवासित जले
शेषे गन्धे परिपूर्ण पाद-पद्मे ढाले
 
 
अनुवाद
उन्होंने सबसे पहले भगवान के चरण कमलों को सुगंधित जल से धोया और फिर उन पर चंदन का लेप लगाया।
 
He first washed the Lord's lotus feet with fragrant water and then applied sandalwood paste on them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)