श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  2.6.105 
পাইযা প্রভুর আজ্ঞা পরম হরিষে
চৈতন্য-চরণ পূজে অশেষ বিশেষে
पाइया प्रभुर आज्ञा परम हरिषे
चैतन्य-चरण पूजे अशेष विशेषे
 
 
अनुवाद
भगवान का आदेश पाकर उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक भगवान चैतन्य के चरणकमलों की पूर्ण ध्यानपूर्वक पूजा की।
 
Upon receiving the Lord's order, he happily worshipped the lotus feet of Lord Chaitanya with full attention.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)