श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  2.6.103 
মোর কিছু শক্তি নাহি তোমার করুণা
তোমা বৈ জীব উদ্ধারিব কোন্ জনা”
मोर किछु शक्ति नाहि तोमार करुणा
तोमा बै जीव उद्धारिब कोन् जना”
 
 
अनुवाद
"आपकी अहैतुकी कृपा के अतिरिक्त मेरा कोई बल नहीं है। आपके अतिरिक्त जीवों का उद्धार कौन कर सकता है?"
 
"I have no strength except your causeless mercy. Who can save the living beings except you?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)