श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  2.6.102 
ঘোষে মাত্র চারি বেদে, যারে নাহি দেখে
হেন তুমি মোর লাগি’ হৈলা পরতেকে
घोषे मात्र चारि वेदे, यारे नाहि देखे
हेन तुमि मोर लागि’ हैला परतेके
 
 
अनुवाद
"चारों वेद केवल आपकी महिमा का वर्णन करते हैं, किन्तु आपको प्रत्यक्ष रूप से देख नहीं सकते। फिर भी आप मेरे कारण ही प्रकट हुए हैं।
 
"The four Vedas only describe your glories, but cannot see you directly. Yet you have appeared because of me.
तात्पर्य
"आज में उसे देख रहा हूँ जिसे चारों वेद नहीं देख पाते पर शब्दों से उसका वर्णन करते हैं।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)