श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  2.5.96 
হুঙ্কার করেন জগন্নাথের নন্দন
কক্ষে তালি দেই’ ঘন বিশাল গর্জন
हुङ्कार करेन जगन्नाथेर नन्दन
कक्षे तालि देइ’ घन विशाल गर्जन
 
 
अनुवाद
जगन्नाथ के पुत्र ने जोर से गर्जना की और बार-बार अपनी कमर थपथपाई।
 
The son of Jagannatha roared loudly and patted his waist repeatedly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)