श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  2.5.93 
শঙ্খ, চক্র, গদা, পদ্ম, শ্রী-হল-মুষল
দেখিযা মূর্ছিত হৈলা নিতাই বিহ্বল
शङ्ख, चक्र, गदा, पद्म, श्री-हल-मुषल
देखिया मूर्छित हैला निताइ विह्वल
 
 
अनुवाद
शंख, चक्र, गदा, कमल, हल और मूसल को देखकर निताई अभिभूत हो गया और बेहोश हो गया।
 
Seeing the conch, discus, mace, lotus, plough and pestle, Nitai was overwhelmed and fainted.
तात्पर्य
नित्यानन्द द्वारा माला पहनाये जाने पर, श्री चैतन्यदेव ने अपना छह-हाथों वाला रूप प्रदर्शित किया। अपने छह हाथों में उन्होंने शंख, चक्र, गदा, कमल, हल, और मुशल धारण कर रखे थे। यह देखकर, नित्यानन्द उन्माद में मूर्च्छित हो गये।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)