श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  2.5.92 
চাঞ্চর চিকুরে মালাশোভে অতি ভাল
ছয ভুজ বিশ্বম্ভর হৈলা তত্-কাল
चाञ्चर चिकुरे मालाशोभे अति भाल
छय भुज विश्वम्भर हैला तत्-काल
 
 
अनुवाद
भगवान के घुंघराले बालों पर वह माला अत्यंत मनमोहक लग रही थी। उस समय विश्वम्भर ने अपना छः भुजाओं वाला रूप प्रकट किया।
 
The garland looked extremely charming on the Lord's curly hair. At that moment, Visvambhara revealed his six-armed form.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)