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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन
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श्लोक 86
श्लोक
2.5.86
যত শুনে নিত্যানন্দ—করে, ’হয হয’
কিসের বচন-পাঠ প্রবোধ না লয
यत शुने नित्यानन्द—करे, ’हय हय’
किसेर वचन-पाठ प्रबोध ना लय
अनुवाद
श्रीवास की बात सुनकर नित्यानंद ने उत्तर दिया, "हाँ। हाँ।" लेकिन ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उन्हें यह नहीं मालूम था कि उन्हें कौन-सा मंत्र पढ़ना चाहिए।
Hearing Srivasa's words, Nityananda replied, "Yes. Yes." But he seemed unsure of which mantra he should recite.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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