श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  2.5.85 
শাস্ত্র-বিধি আছে মালা আপনে সে দিবাব্যাস
তুষ্ট হৈলে সর্ব অভীষ্ট পাইবা
शास्त्र-विधि आछे माला आपने से दिबाव्यास
तुष्ट हैले सर्व अभीष्ट पाइबा
 
 
अनुवाद
"शास्त्रों का आदेश है कि व्यक्ति को स्वयं व्यासदेव को माला अर्पित करनी चाहिए, क्योंकि यदि व्यासदेव प्रसन्न हो जाएं तो आपकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाएंगी।"
 
"The scriptures dictate that one should offer the garland to Vyasadeva himself, because if Vyasadeva is pleased then all your wishes will be fulfilled."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)