श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  2.5.84 
“শুন শুন নিত্যানন্দ, এই মালা ধর
বচন পডিযা ব্যাসদেবে নমস্কর’
“शुन शुन नित्यानन्द, एइ माला धर
वचन पडिया व्यासदेवे नमस्कर’
 
 
अनुवाद
हे नित्यानंद, कृपया सुनें। उचित मंत्रों का पाठ करने के बाद, यह माला और अपना प्रणाम व्यासदेव को अर्पित करें।
 
O Nityananda, please listen. After reciting the appropriate mantras, offer this rosary and your obeisances to Vyasadeva.
तात्पर्य
श्रीवास पंडित ने गंधयुक्त वन-पुष्प की माला नित्यानंद के हाथो में दी और उनसे व्यास की वंदना करने को कहा।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)