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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन
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श्लोक 83
श्लोक
2.5.83
দিব্য-গন্ধ সহিত সুন্দর বন-মালা
নিত্যানন্দ হাতে দিযা কহিতে লাগিলা
दिव्य-गन्ध सहित सुन्दर वन-माला
नित्यानन्द हाते दिया कहिते लागिला
अनुवाद
उन्होंने नित्यानंद के हाथों में वन पुष्पों की एक आकर्षक माला रख दी और उनसे बातें कीं।
He placed a beautiful garland of forest flowers in Nityananda's hands and spoke to him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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