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श्लोक 2.5.83  |
দিব্য-গন্ধ সহিত সুন্দর বন-মালা
নিত্যানন্দ হাতে দিযা কহিতে লাগিলা |
दिव्य-गन्ध सहित सुन्दर वन-माला
नित्यानन्द हाते दिया कहिते लागिला |
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| अनुवाद |
| उन्होंने नित्यानंद के हाथों में वन पुष्पों की एक आकर्षक माला रख दी और उनसे बातें कीं। |
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| He placed a beautiful garland of forest flowers in Nityananda's hands and spoke to him. |
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