श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  2.5.76 
সাঙ্তারে গঙ্গার মাঝে নির্ভয শরীর
চৈতন্যের বাক্যে মাত্র কিছু হয স্থির
साङ्तारे गङ्गार माझे निर्भय शरीर
चैतन्येर वाक्ये मात्र किछु हय स्थिर
 
 
अनुवाद
वे निर्भयतापूर्वक गंगा के जल में तैरने लगे, किन्तु चैतन्य के शब्दों से वे कुछ हद तक शांत हो गये।
 
He fearlessly began to swim in the waters of the Ganges, but Chaitanya's words calmed him somewhat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)