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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन
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श्लोक 74
श्लोक
2.5.74
চঞ্চল শ্রী-নিত্যানন্দ না মানে বচন
তবে এক-বার প্রভু করযে তর্জন
चञ्चल श्री-नित्यानन्द ना माने वचन
तबे एक-बार प्रभु करये तर्जन
अनुवाद
बेचैन नित्यानंद किसी की बात नहीं सुनते थे। इसीलिए भगवान कभी-कभी उन्हें डाँटते थे।
The restless Nityananda would not listen to anyone. Therefore, the Lord would sometimes rebuke him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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