श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  2.5.73 
শ্রীবাসাদি সবাই চলিলা গঙ্গা-স্নানে
দণ্ড থুইলেন প্রভু গঙ্গায আপনে
श्रीवासादि सबाइ चलिला गङ्गा-स्नाने
दण्ड थुइलेन प्रभु गङ्गाय आपने
 
 
अनुवाद
श्रीवास तथा अन्य भक्तों के साथ भगवान गंगा नदी पर गए और टूटे हुए दण्ड को जल में डाल दिया।
 
Accompanied by Srivasa and other devotees, the Lord went to the river Ganga and cast the broken staff into the water.
तात्पर्य
महाप्रभु ने स्वयं नित्यानंद स्वरूप का दंडा गंगा में डाल दिया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)