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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन
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श्लोक 72
श्लोक
2.5.72
দণ্ড লৈলেন প্রভু শ্রী-হস্তে তুলিযা
চলিলেন গঙ্গা-স্নানে নিত্যানন্দ লৈঞা
दण्ड लैलेन प्रभु श्री-हस्ते तुलिया
चलिलेन गङ्गा-स्नाने नित्यानन्द लैञा
अनुवाद
भगवान ने अपने हाथों से टूटे हुए डंडे को उठाया और नित्यानंद के साथ गंगा स्नान करने चले गए।
The Lord picked up the broken stick with his own hands and went to take a bath in the Ganga with Nityananda.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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