श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  2.5.66 
ভক্ত-গণ চলিলেন আপনার ঘরে
নিত্যানন্দ রহিলেন শ্রীবাস-মন্দিরে
भक्त-गण चलिलेन आपनार घरे
नित्यानन्द रहिलेन श्रीवास-मन्दिरे
 
 
अनुवाद
तब सभी भक्तगण अपने-अपने घर लौट गये, जबकि नित्यानंद श्रीवास के घर में ही रहे।
 
Then all the devotees returned to their homes, while Nityananda stayed in Srivas's house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)