श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  2.5.65 
“স্থির হও, কালি পূজিবারে চাহ ব্যাস”
স্থির করাইযা প্রভু গেলা নিজ-বাস
“स्थिर हओ, कालि पूजिबारे चाह व्यास”
स्थिर कराइया प्रभु गेला निज-वास
 
 
अनुवाद
“शांत रहो, कल तुम्हें व्यासदेव की पूजा करनी है।” ऐसा कहकर भगवान घर लौट गये।
 
“Be calm, tomorrow you have to worship Vyasadeva.” Saying this, the Lord returned home.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)