श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  2.5.61 
ক্ষণে হাসে, ক্ষণে কান্দে, ক্ষণে দিগম্বর
বাল্য-ভাবে পূর্ণ হৈল সর্ব-কলেবর
क्षणे हासे, क्षणे कान्दे, क्षणे दिगम्बर
बाल्य-भावे पूर्ण हैल सर्व-कलेवर
 
 
अनुवाद
एक क्षण वे हँसे, एक क्षण रोए, और अगले ही क्षण नग्न हो गए। उनका पूरा शरीर एक बालक के स्वभाव से भरा हुआ था।
 
One moment he laughed, the next he cried, and the next he was naked. His whole body was filled with the nature of a child.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)