नित्यानंद, जो शेष से अभिन्न हैं, अपनी आनंदमय मनोदशा को नियंत्रित नहीं कर सके और प्रेममय भक्ति के रस में डूब गए।
Nityananda, who is inseparable from Shesha, could not control his ecstatic mood and was immersed in the nectar of loving devotion.
तात्पर्य
वह नित्यानंद प्रभु, जिनका संपूर्ण हिस्सा भगवान विष्णु का अवतार है, उन्हें यहाँ शेष कहा गया है। चूँकि हिस्सा समग्र में शामिल होता है, या चूँकि समग्र और हिस्सा दोनों विष्णु-तत्त्व हैं, इसलिए नित्यानंद प्रभु को शेष कहने में कोई विरोधाभास नहीं है। श्री चैतन्य-चरितामृत (आदि 5.124-125) में कहा गया है: "इसलिये उन्हें भगवान शेष कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने कृष्ण की सेवा की पराकाष्ठा प्राप्त की है। वह कृष्ण की सेवा के लिए कई रूप धारण करते हैं, और इस प्रकार वे भगवान की सेवा करते हैं। वह व्यक्ति जिसके लिए भगवान अनंत कला हैं, या संपूर्ण हिस्से का हिस्सा है, वे हैं भगवान नित्यानंद प्रभु। इसलिए, कौन भगवान नित्यानंद के लीलाओं को जान सकता है?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥