श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.5.6 
হাসে প্রভু নিত্যানন্দ চারি-দিকে দেখি’
বহযে আনন্দ-ধারা সবাকার-আঙ্খি
हासे प्रभु नित्यानन्द चारि-दिके देखि’
वहये आनन्द-धारा सबाकार-आङ्खि
 
 
अनुवाद
नित्यानंद प्रभु मुस्कुराए और चारों ओर देखने लगे। सभी की आँखों से प्रेम के आँसू बह निकले।
 
Nityananda Prabhu smiled and looked around. Tears of love flowed from everyone's eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)