श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  2.5.58 
সবারে করেন প্রভু প্রেম-আলিঙ্গন
“অপরাধ মোর না লৈবা সর্ব-ক্ষণ”
सबारे करेन प्रभु प्रेम-आलिङ्गन
“अपराध मोर ना लैबा सर्व-क्षण”
 
 
अनुवाद
भगवान ने प्रेमपूर्वक सभी को गले लगाया और कहा, “कृपया मेरे व्यवहार से कभी नाराज न हों।”
 
The Lord lovingly embraced everyone and said, “Please never be angry with my behavior.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)