तब भगवान ने पूछा, “क्या मैं बेचैन हो गया हूँ?” भक्तों ने उत्तर दिया, “ज़्यादा नहीं।”
Then the Lord asked, “Am I restless?” The devotees replied, “Not much.”
तात्पर्य
इस प्रकार से बात करने के बाद और श्रोताओं की पात्रता पर ध्यान देने के बाद, श्री गौराहरि ने उनसे पूछा, "क्या आपको मेरे भाषण में कोई अहंकार लगा?" भक्तों ने उत्तर दिया, "आपके बयानों में आपने सकल और सूक्ष्म पदनामों के बारे में कुछ भी अनुचित नहीं कहा। आम तौर पर हर जीव इस दृश्य दुनिया के अस्थायी सकल और सूक्ष्म विषयों में लीन है। लेकिन आपके शब्द शाश्वत ज्ञान और आनंद देते हैं; वे बिना भौतिक पदनामों के परम सत्य हैं।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥