श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  2.5.52 
মোহারে আনিলা নাডা বৈকুণ্ঠ
থাকিযানিশ্চিন্তে রহিল গিযা হরিদাস লৈঞা
मोहारे आनिला नाडा वैकुण्ठ
थाकियानिश्चिन्ते रहिल गिया हरिदास लैञा
 
 
अनुवाद
“नादा मुझे वैकुंठ से लाए हैं, लेकिन अब वे हरिदास के साथ सभी चिंताओं से मुक्त होकर रह रहे हैं।
 
“Nada has brought me from Vaikuntha, but now he is living with Haridasa, free from all worries.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)