श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  2.5.47 
সর্ব-গণে দেই জল, প্রভু করে পান
সত্য যেন কাদম্বরী পিযে, হেন জ্ঞান
सर्व-गणे देइ जल, प्रभु करे पान
सत्य येन कादम्बरी पिये, हेन ज्ञान
 
 
अनुवाद
सभी भक्तों ने जल अर्पित किया और भगवान ने जल पिया। ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं भगवान बलराम जल पी रहे हों।
 
All the devotees offered water, and the Lord drank it. It appeared as if Lord Balarama himself was drinking the water.
तात्पर्य
कादंबरी शब्द का अर्थ है (कु-"नीला" + अंबर-"वस्त्र") "जो नीला वस्त्र पहनता है" (बलराम) या "गन्ने के गुड़ से बनी एक प्रकार की शराब"।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)