श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  2.5.41 
কর দেখে কেহ, আর কিছুই না দেখে
কেহ বা দেখিল হল-মুষল প্রত্যক্ষে
कर देखे केह, आर किछुइ ना देखे
केह वा देखिल हल-मुषल प्रत्यक्षे
 
 
अनुवाद
कुछ लोगों को उनके हाथों के अलावा कुछ भी दिखाई नहीं दिया, जबकि अन्य लोगों को सीधे हल और गदा दिखाई दी।
 
Some people saw nothing except his hands, while others saw the plough and mace directly.
तात्पर्य
कुछ दर्शकों ने हल और गदा को सीधे नहीं देखा, बल्कि केवल खाली हाथों में लेन-देन होते हुए देखा। फिर भी अन्य लोग थे जिन्होंने हल और गदा के आदान-प्रदान को सीधे देखा।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)