श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.5.40 
পাইযা প্রভুর আজ্ঞা প্রভু নিত্যানন্দ
করে দিলা, কর পাতি’ লৈলা গৌরচন্দ্র
पाइया प्रभुर आज्ञा प्रभु नित्यानन्द
करे दिला, कर पाति’ लैला गौरचन्द्र
 
 
अनुवाद
भगवान के निर्देशानुसार नित्यानंद प्रभु ने वे वस्तुएं गौरचंद्र के हाथों में रख दीं, जिन्होंने उन्हें स्वीकार कर लिया।
 
As instructed by the Lord, Nityananda Prabhu placed the articles in the hands of Gaurachandra, who accepted them.
तात्पर्य
श्री गौराहरि के आदेश को पाकर, नित्यानंद प्रभु ने श्री गौरासुंदर के हाथ में अनुरोधित लाठी और हल रखा और श्री गौरासुंदर ने उन्हें अपने हाथों में ले लिया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)