श्री गौराहरि के आदेश को पाकर, नित्यानंद प्रभु ने श्री गौरासुंदर के हाथ में अनुरोधित लाठी और हल रखा और श्री गौरासुंदर ने उन्हें अपने हाथों में ले लिया।