श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.5.4 
হেন-মতে নিত্যানন্দ-সঙ্গে কুতূহলে
কৃষ্ণ-কথা-রসে সবে হৈলা বিহ্বলে
हेन-मते नित्यानन्द-सङ्गे कुतूहले
कृष्ण-कथा-रसे सबे हैला विह्वले
 
 
अनुवाद
इस प्रकार नित्यानन्द की संगति में कृष्ण विषयक चर्चा करते हुए सभी भक्तगण भावविभोर हो गए।
 
In this way, all the devotees became emotional while discussing about Krishna in the company of Nityananda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)