श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.5.37 
নিত্যানন্দ প্রকাশিতে প্রভু বিশ্বম্ভর
বলরাম-ভাবে উঠে খট্টার উপর
नित्यानन्द प्रकाशिते प्रभु विश्वम्भर
बलराम-भावे उठे खट्टार उपर
 
 
अनुवाद
नित्यानंद की महिमा प्रकट करने के लिए भगवान विश्वम्भर बलराम की भाव-मुद्रा में लीन हो गए और सिंहासन पर बैठ गए।
 
To reveal the glory of Nityananda, Lord Visvambhara assumed the posture of Balarama and sat on the throne.
तात्पर्य
यद्यपि विश्वम्भर बलदेव-तत्त्व नही है, उन्होंने बलदेव का भाव, जो उनका विस्तार है, स्वीकार किया, और सिंहासन पर बैठ गए। श्रीनिताई बलदेव-तत्त्व हैं; अतः, बलदेव-तत्त्व द्वारा प्रदर्शित की गयी लीलाओं को प्रकट करने के लिए, प्रभु, जो व्रजेन्द्र-नंदन हैं, जो भगवान के मूल व्यक्तित्व हैं, ने बलदेव के भाव में तल्लीन होने की लीला का प्रदर्शन किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)