श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.5.34 
বিশ্বম্ভর নৃত্য করে অতি মনোহর
নিজ শির লাগে গিযা চরণ-উপর
विश्वम्भर नृत्य करे अति मनोहर
निज शिर लागे गिया चरण-उपर
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर का नृत्य अत्यंत मनमोहक था, क्योंकि उनके चरण उनके सिर को छू रहे थे।
 
Vishvambhara's dance was very captivating, as his feet were touching his head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)