श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.5.29 
পরম আনন্দে দোঙ্হে গডাগডি যায
আপনা না জানে দোঙ্হে আপন লীলায
परम आनन्दे दोङ्हे गडागडि याय
आपना ना जाने दोङ्हे आपन लीलाय
 
 
अनुवाद
वे दोनों आनंद में डूबकर भूमि पर लोटने लगे और अपनी लीलाओं में मग्न होकर स्वयं को भूल गए।
 
Both of them, immersed in joy, started rolling on the ground and, engrossed in their pastimes, forgot themselves.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)