श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.5.24 
চির দিবসের প্রেমে চৈতন্য-নিতাই
দোঙ্হে দোঙ্হা ধ্যান করি’ নাচে এক ঠাঞি
चिर दिवसेर प्रेमे चैतन्य-निताइ
दोङ्हे दोङ्हा ध्यान करि’ नाचे एक ठाञि
 
 
अनुवाद
चैतन्य और निताई शाश्वत प्रेम से बंधे हैं। वे एक-दूसरे का ध्यान करते हुए नृत्य कर रहे थे।
 
Chaitanya and Nitai, bound by eternal love, danced while meditating on each other.
तात्पर्य
श्री चैतन्य और श्री नित्यानंद दोनों प्रेम-सूत्र में सदा के लिए बद्ध हैं। दोनों एक दूसरे का ही ध्यान कर रहे थे जब वे साथ-साथ नाच रहे थे। परमेश्वर अपने दास का ध्यान कर रहा था और भक्त अपने भगवान का ध्यान कर रहा था। इस श्लोक में आया शब्द ध्यान भौतिक विचारों को संदर्भित नहीं करता। ध्यान यहाँ आध्यात्मिक तल्लीनता को संकेत करता है। दूसरे शब्दों में, स्थूल भौतिक विचारों से रहित और आध्यात्मिक आनंद से परिपूर्ण ध्यान। जिस तरह इंद्रियाँ मस्तिष्क की सेवा करने के लिए स्थूल जगत से किसी वस्तु के सूक्ष्म रूप को प्राप्त करती हैं, जो इंद्रियों का आधार है, और इस तरह अपनी स्थूल स्थिति को सूक्ष्म में बदल देती हैं। केवल शाश्वत आध्यात्मिक वस्तुओं की इच्छा को धारण करते हुए भौतिक आनंद को छोड़ देने से इस संसार में विविध आध्यात्मिक आनंद की प्राप्ति होती है। इस जगत से प्राप्त होने वाला भौतिक आनंद आध्यात्मिक आनंद से जो इस तरह से प्राप्त हुआ है, वैसे बिल्कुल भिन्न है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)