श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.5.22 
কীর্তন করিতে আজ্ঞা করিলাঠাকুর
উঠিল কীর্তন-ধ্বনি, বাহ্য গেল দূর
कीर्तन करिते आज्ञा करिलाठाकुर
उठिल कीर्तन-ध्वनि, बाह्य गेल दूर
 
 
अनुवाद
भगवान ने कीर्तन शुरू करने का निर्देश दिया। जैसे ही उस कीर्तन की ध्वनि उठी, सभी की बाह्य चेतना समाप्त हो गई।
 
The Lord instructed them to begin chanting. As soon as the sound of chanting arose, everyone lost their external consciousness.
तात्पर्य
व्यास-पूजा से पूर्व, श्री गौरसुन्दर ने भक्तों को कीर्तन आरंभ करने का आदेश दिया। भगवान के अंतरंग सेवकों के अतिरिक्त, किसी को भी व्यास-पूजा क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने दिया गया। जब भक्तों ने भगवान के निर्देशानुसार जोर-जोर से मंत्रोच्चार आरंभ किया, तो उन्होंने अपनी विभिन्न बाहरी धारणाओं और विचारों को खो दिया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)