श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.5.20 
প্রবিষ্ট হৈলা মাত্র শ্রীবাস-মন্দিরে
বড কৃষ্ণানন্দ হৈল সবার শরীরে
प्रविष्ट हैला मात्र श्रीवास-मन्दिरे
बड कृष्णानन्द हैल सबार शरीरे
 
 
अनुवाद
जैसे ही उन्होंने श्रीवास के घर में प्रवेश किया, सभी लोग कृष्ण के प्रति आनंदित प्रेम से भर गए।
 
As soon as He entered Srivasa's house, everyone was filled with blissful love for Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)