श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.5.18 
আনন্দিত নিত্যানন্দ প্রভুর বচনে
সেই ক্ষণে আজ্ঞা লৈ’ করিলা গমনে
आनन्दित नित्यानन्द प्रभुर वचने
सेइ क्षणे आज्ञा लै’ करिला गमने
 
 
अनुवाद
भगवान के वचनों से नित्यानन्द प्रसन्न हुए। भगवान की आज्ञा मानकर वे सभी तुरन्त चले गए।
 
Nityananda was pleased with the Lord's words. Obeying the Lord's command, they all immediately left.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)