श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 171
 
 
श्लोक  2.5.171 
এই-মত নানা দিনে নানা সে কৌতুকে
নবদ্বীপে হয, নাহি জানে সর্ব-লোকে
एइ-मत नाना दिने नाना से कौतुके
नवद्वीपे हय, नाहि जाने सर्व-लोके
 
 
अनुवाद
इस प्रकार नवद्वीप में विभिन्न लीलाएँ नियमित रूप से होती रहती थीं, परन्तु लोगों को उनके बारे में पता नहीं था।
 
Thus various pastimes were regularly taking place in Navadvipa, but people were not aware of them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)