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श्लोक 2.5.165  |
ঠাকুর পণ্ডিত-প্রতি বলে বিশ্বম্ভর
“ব্যাসের নৈবেদ্য সব আনহ সত্বর” |
ठाकुर पण्डित-प्रति बले विश्वम्भर
“व्यासेर नैवेद्य सब आनह सत्वर” |
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| अनुवाद |
| विश्वम्भर ने श्रीवास पण्डित से कहा, “अब व्यासदेव को अर्पित किये गये भोजन के अवशेष ले आओ।” |
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| Vishvambhar said to Srivasa Pandita, “Now bring the remains of the food offered to Vyasadeva.” |
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