श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 165
 
 
श्लोक  2.5.165 
ঠাকুর পণ্ডিত-প্রতি বলে বিশ্বম্ভর
“ব্যাসের নৈবেদ্য সব আনহ সত্বর”
ठाकुर पण्डित-प्रति बले विश्वम्भर
“व्यासेर नैवेद्य सब आनह सत्वर”
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर ने श्रीवास पण्डित से कहा, “अब व्यासदेव को अर्पित किये गये भोजन के अवशेष ले आओ।”
 
Vishvambhar said to Srivasa Pandita, “Now bring the remains of the food offered to Vyasadeva.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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