श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 164
 
 
श्लोक  2.5.164 
এই মতে নিজ ভক্তি-যোগ প্রকাশিযাস্থির
হৈলা বিশ্বম্ভর সর্ব-গণ লৈযা
एइ मते निज भक्ति-योग प्रकाशियास्थिर
हैला विश्वम्भर सर्व-गण लैया
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अपनी भक्ति का सत्य प्रकट करने के बाद विश्वम्भर और उनके सहयोगी शान्त हो गये।
 
Thus, after revealing the truth of their devotion, Vishvambhar and his associates became calm.
तात्पर्य
भक्ति सेवा की प्रक्रियाएं असंख्य हैं। श्री गौरासुन्दर ने श्री व्यास-पूजा का आयोजन करके भक्ति सेवा की एक प्रक्रिया का खुलासा किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)