श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 161
 
 
श्लोक  2.5.161 
সূত্র করি’ কহি কিছু চৈতন্য-চরিত
যে-তে-মতে কৃষ্ণ গাহিলেই হয হিত
सूत्र करि’ कहि किछु चैतन्य-चरित
ये-ते-मते कृष्ण गाहिलेइ हय हित
 
 
अनुवाद
मैं केवल भगवान चैतन्य की कुछ विशेषताओं का वर्णन संहिताओं के रूप में करने का प्रयास कर रहा हूँ, क्योंकि किसी भी प्रकार से कृष्ण की महिमा करने से लाभ होता है।
 
I am simply trying to describe some of the characteristics of Lord Chaitanya in the form of samhitas, because glorifying Krishna in any way is beneficial.
तात्पर्य
श्री व्यास की पूजा करते हुए , आचार्यों की पूजा करते हुए , महान मानवों की पूजा करते हुए , और कृष्ण के विभिन्न अवतारों की पूजा करते हुए , कोई कृष्ण के नामों का जाप करता है और इस प्रकार पूरे ब्रह्मांड को लाभ देता है |
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)