श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.5.16 
প্রীত হৈলা মহাপ্রভু শ্রীবাসের বোলে
’হরি হরি’ ধ্বনি করে বৈষ্ণব-সকলে
प्रीत हैला महाप्रभु श्रीवासेर बोले
’हरि हरि’ ध्वनि करे वैष्णव-सकले
 
 
अनुवाद
श्रीवास के वचनों से महाप्रभु बहुत प्रसन्न हुए और सभी वैष्णव “हरि, हरि” का जाप करने लगे।
 
Mahaprabhu was very pleased with the words of Srivasa and all the Vaishnavas started chanting “Hari, Hari”.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)