श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 159
 
 
श्लोक  2.5.159 
বিশ্বম্ভর-নিত্যানন্দ দেখেন যখনে
’দুই জন মোর পুত্র’ হেন বাসে মনে
विश्वम्भर-नित्यानन्द देखेन यखने
’दुइ जन मोर पुत्र’ हेन वासे मने
 
 
अनुवाद
जब भी माता शची विश्वम्भर और नित्यानंद को देखतीं, तो सोचतीं, “ये दोनों मेरे पुत्र हैं।”
 
Whenever Mother Shachi saw Vishvambhar and Nityananda, she would think, “These two are my sons.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)