यस्य देवे परा भक्तिर यथा देवे तथा गुरु
तस्यैते कथिता ह्य अर्था: प्रकाशंते महत्मनः
"केवल उन महान आत्माओं के लिए जिनकी भगवान और आध्यात्मिक गुरु दोनों में पूर्ण आस्था है, वैदिक ज्ञान के सभी आयात स्वचालित रूप से प्रकट होते हैं।" वेदों के गुप्त सत्य बाहरी ज्ञान की पेचीदगियों के परिणामस्वरूप पक्षपातपूर्ण दृष्टि वाले लोगों के लिए प्रकट नहीं होते हैं। भौतिक धारणाएँ वैकुंठ की ओर नहीं ले जा सकतीं। माया से भ्रमित होने वाली आत्माएं गैर-वैष्णव हैं, और मुक्त आत्माएं पारलौकिक, या वैष्णव हैं। इसलिए वे अपने संबंधित वातानुकूलित और मुक्त पदों को लगातार महसूस करते हैं। वैष्णव सड़क पर भूसे से अधिक विनम्र, पेड़ से अधिक सहिष्णु, सम्मान की इच्छा से मुक्त होते हैं, और हमेशा दूसरों का सम्मान करने के लिए तैयार रहते हैं, इस तरह वे हमेशा कृष्ण की सेवा करते हैं।
