श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 157
 
 
श्लोक  2.5.157 
কেহ নাচে, কেহ গায, কেহ গডি’ যায
সবেই চরণ ধরে, যে যাহার পায
केह नाचे, केह गाय, केह गडि’ याय
सबेइ चरण धरे, ये याहार पाय
 
 
अनुवाद
कुछ नाच रहे थे, कुछ गा रहे थे, कुछ ज़मीन पर लोट रहे थे। कुछ भक्त दूसरों के पैर पकड़ने की कोशिश कर रहे थे।
 
Some were dancing, some were singing, some were rolling on the ground. Some devotees were trying to grab the feet of others.
तात्पर्य
एक दूसरे के चरणों से धूलि लेकर वैष्णव अपनी विनम्रता प्रकट करते हैं। भौतिकवादी व्यक्ति जो झूठे अहंकार से भ्रमित हैं, अपनी प्रतिष्ठा स्थापित करने के लिए दूसरों से सम्मान की माँग करते हैं। एक वैष्णव अमानी होता है, या दूसरों से सम्मान की इच्छा से मुक्त होता है, इसलिए वे अज्ञानी भौतिकवादी लोगों की तरह अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने का प्रयास नहीं करते हैं। इसीलिए वैष्णव एक विनम्र जानकार ब्राह्मण का सम्मान करते हैं जो महा-भागवत के दृष्टिकोण से कुत्ता, कुत्ता खाने वाले, गाय और गधे को समान देखते हैं। द्वैतवादी दृष्टि वाले को कभी भी ब्रह्मान का ज्ञानी नहीं कहा जा सकता है। दूसरे शब्दों में, वे अद्वैत-ज्ञान, परम सत्य को समझने के लिए अयोग्य हैं। भगवान विष्णु हर जीवित इकाई और हर भौतिक परमाणु के भीतर स्थित हैं, जो इसलिए भगवान हरि के मंदिर हैं। इस सिद्धांत को तथाकथित ब्राह्मणों द्वारा नहीं समझा जाता है जो भौतिक प्रकृति के तीनों गुणों का शिकार होते हैं। केवल वैष्णव ही उनके आध्यात्मिक गुरु के रूप में कार्य कर सकते हैं और वैदिक मंत्रों में उन्हें निर्देश दे सकते हैं।

यस्य देवे परा भक्तिर यथा देवे तथा गुरु

तस्यैते कथिता ह्य अर्था: प्रकाशंते महत्मनः

"केवल उन महान आत्माओं के लिए जिनकी भगवान और आध्यात्मिक गुरु दोनों में पूर्ण आस्था है, वैदिक ज्ञान के सभी आयात स्वचालित रूप से प्रकट होते हैं।" वेदों के गुप्त सत्य बाहरी ज्ञान की पेचीदगियों के परिणामस्वरूप पक्षपातपूर्ण दृष्टि वाले लोगों के लिए प्रकट नहीं होते हैं। भौतिक धारणाएँ वैकुंठ की ओर नहीं ले जा सकतीं। माया से भ्रमित होने वाली आत्माएं गैर-वैष्णव हैं, और मुक्त आत्माएं पारलौकिक, या वैष्णव हैं। इसलिए वे अपने संबंधित वातानुकूलित और मुक्त पदों को लगातार महसूस करते हैं। वैष्णव सड़क पर भूसे से अधिक विनम्र, पेड़ से अधिक सहिष्णु, सम्मान की इच्छा से मुक्त होते हैं, और हमेशा दूसरों का सम्मान करने के लिए तैयार रहते हैं, इस तरह वे हमेशा कृष्ण की सेवा करते हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)