श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 152
 
 
श्लोक  2.5.152 
বাহ্য পাই’ নিত্যানন্দ করেন ক্রন্দনে
মহানদী বহে দুই কমল নযনে
बाह्य पाइ’ नित्यानन्द करेन क्रन्दने
महानदी वहे दुइ कमल नयने
 
 
अनुवाद
चेतना वापस आते ही नित्यानंद रोने लगे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो उनके दोनों कमल-नेत्रों से कोई विशाल नदी बह रही हो।
 
As soon as he regained consciousness, Nityananda began to cry. It seemed as if a mighty river was flowing from his two lotus eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)